सह-नागरिकता के भाव को विकसित करना ज़रूरी
वक़्त बेवक़्त 10 Jun, 2019
य की माँग करते हुए जब किसी समुदाय को कठघरे में खड़ा किया जाए या उसे अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाया जाए तो न्याय की वह माँग ही अन्याय बन जाती है। वह संवेदना से अधिक घृणा का संगठन है। ट्विंकल की हत्या के बाद क्यों गाँव के मुसलमान भय से गाँव छोड़ रहे हैं? पाकिस्तान में सलमान तासीर की संवेदना, न्यूज़ीलैंड में प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न की संवेदना, श्रीलंका में हिंदू समूहों की संवेदना ईमानदार है। वह स्वार्थ से परे है, इसलिए भी और इस कारण भी कि वह आत्मरक्षा या ख़ुद के प्रभुत्व की इच्छा से मुक्त है।
अलीगढ़ के पास टप्पल इलाक़े में ढाई साल की मासूम ट्विंकल की हत्या के बाद सिर्फ़ अलीगढ़ ही नहीं, देश के कोने-कोने से बच्ची के लिए इंसाफ़ की माँग की जा रही है। हत्या पर अफ़सोस, शर्म और नाराज़गी का इजहार किया जा रहा है।ढाई साल की बच्ची को आपसी रंजिश के चलते ही क्यों नहीं, मार डालना परले दर्जे की विकृति है और उसका कोई मनोवैज्ञानिक औचित्य नहीं दिया जा सकता। यह तथ्य कि अभियुक्त पहले से ही ऐसा था, मारी गई बच्ची के परिजनों को कोई राहत नहीं पहुँचाता। ढाई साल की बच्ची की हत्या इसलिए भी अधिक क्रूर है क्योंकि वह बच्ची किसी भी तरह अपनी रक्षा नहीं कर सकती थी। शायद ट्विंकल बच जाती अगर पुलिस ने पहले ही परिवार की गुहार सुन ली होती। इसलिए ज़िम्मेवार पुलिसकर्मियों को सज़ा होनी भी ज़रूरी है।
ट्विंकल की हत्या के प्रसंग में रमज़ान को रेखांकित किया जाना दो व्यक्तियों के अपराध के लिए उनके पूरे समुदाय या धर्म को ज़िम्मेवार ठहराना है।
श्रीलंका में कथित “इस्लामी” संगठन के द्वारा गिरिजाघरों पर हमले के बाद वहाँ मुसलमानों के ख़िलाफ़ हिंसा हुई। बौद्ध कट्टरपंथियों ने सरकार में मुसलमान मंत्रियों के ख़िलाफ़ आंदोलन छेड़ दिया कि दहशतगर्दों से उनके रिश्ते की जाँच होनी चाहिए। इसके कारण मुसलमान मंत्रियों ने इस्तीफ़ा दिया। इस इस्तीफ़े के विरुद्ध श्रीलंका के हिंदू तमिल मुखर हुए हैं। वे दहशतगर्द हमलों के कारण सारे मुसलमान समुदाय को संदिग्ध बनाए जाने की मुहिम को ख़तरनाक मान रहे हैं।
बहुसंख्यक समुदाय पर है बड़ी ज़िम्मेदारी
श्रीलंका में तमिल हिंदू और मुसलमान, दोनों ही अल्पसंख्यक हैं। एक पर जब बहुसंख्यक आक्रमण हो तो दूसरे का उसकी एकजुटता में खड़ा होना ही स्वाभाविक है। लेकिन उससे भी ज़रूरी है सिंहली बौद्धों का उनके पक्ष में उठना। जब ये दो अल्पसंख्यक समुदाय एक-दूसरे के साथ खड़े होते है तो वे स्वतः ही बहुसंख्यकवादी दबाव के ख़िलाफ़ भी हैं। यह ज़िम्मेदारी अब बहुसंख्यक समुदाय की है कि वह श्रीलंका की नागरिकता को व्यापक करने के लिए इन समूहों की चिंता में शामिल हो।यह हमने न्यूजीलैंड में देखा जब मसजिदों पर श्वेत श्रेष्ठतावादी हमले हुए तो देश के श्वेत और ईसाई, मुसलमानों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने के लिए बाहर आए। इससे मुसलमानों को न्यूजीलैंड की नागरिकता में शामिल होने का भरोसा हुआ।
यह सह-नागरिकता का संगठन है। यह निरंतर चलने वाली और सचेत होनी चाहिए। इसलिए कि समाज में अन्याय का स्रोत हो सकता है कि एक व्यक्ति हो, लेकिन उस अन्याय के पीछे एक विचार होता है जो साझा होता है। टप्पल की ट्विंकल की हत्या के पीछे यह विचार कि किसी से विवाद की स्थिति में आप उसके संबंधी या परिजन से बदला ले सकते हैं, या उन्हें हानि पहुँचाकर उसे पीड़ित कर सकते हैं, कितना व्यापक है, हम जानते हैं।एक व्यक्ति के अपराध की सज़ा उसके परिवार या जातीय अथवा धार्मिक समुदाय को देने की इच्छा कितनी आम और कितनी सहज है! इसके ख़िलाफ़ कितना सजग रहना होता है! किसी जगह दलित दूल्हे के घोड़ी चढ़ने पर हिंसा के पीछे जातीय श्रेष्ठता और विशेषाधिकार का विचार है, इसलिए ऐसी घटना का विरोध हिंसा के शिकार व्यक्ति की तरह के लोगों से ज़्यादा उन्हें करना चाहिए जो किसी रूप में हिंसक समुदाय के अंग माने जाते हैं। यह इस कारण कि इस प्रकार की हिंसा भले ही एक व्यक्ति या कुछ लोग कर रहे हों, वे असमानता के विचार के कारण ही ऐसा कर रहे हैं। यह मानकर भी वे यह हिंसा कर आगे हैं कि वे यह अपने लिए और अपनी तरफ़ से नहीं बल्कि अपने समुदाय के लिए और उसकी तरफ़ से कर रहे हैं। उस समय उस समुदाय को ख़ुद को उससे अलग करना ही होता है।
उसी तरह दिल्ली में जब कोई व्यक्ति या समूह मणिपुरी समुदाय पर हमला करे तो उत्तर भारतीयों का उसके ख़िलाफ़ मुखर होना मणिपुरी लोगों को भारत के सह-नागरिक होने का आश्वासन देता है।
उसी तरह एक हिंसा के शिकार के न्याय के रास्ते में हो सकता है, बाधा डाली जा रही हो लेकिन दूसरी घटना में यह नहीं भी हो सकता है। इसलिए हत्या और हिंसा की हर घटना की तुलना नहीं की जा सकती। आसिफ़ा की हत्या के बाद उसके इलाक़े के हिंदू अभियुक्तों के पक्ष में आंदोलन करने लगे। ट्विंकल की हत्या के बाद क्या अभियुक्तों की ओर से मुसलमान सड़क पर आ गए हैं?
न्याय की माँग करते हुए जब किसी समुदाय को कठघरे में खड़ा किया जाए या उसे अप्रत्यक्ष रूप से निशाना बनाया जाए तो न्याय की वह माँग ही अन्याय बन जाती है। वह संवेदना से अधिक घृणा का संगठन है। ट्विंकल की हत्या के बाद क्यों गाँव के मुसलमान भय से गाँव छोड़ रहे हैं?
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