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Showing posts from November, 2024

संभल हिंसाः क्या इसका यूपी उपचुनाव 2024 से कोई संबंध है?

  वक़्त  बेवक़्त,  25 Nov, 2024 उत्तर प्रदेश के संभल में 3 मुसलमानों की मौत का हाल के विधान सभा चुनाव नतीजों के साथ क्या रिश्ता हो सकता है? उत्तर प्रदेश के विधान सभा उपचुनावों में 9 में से 7 सीटों पर  भारतीय जनता पार्टी ने जो जीत हासिल की उसका कोई संबंध इन मौतों से जोड़ना हास्यास्पद  लगेगा। लेकिन अगर आप चुनावों में पुलिस और प्रशासन की भूमिका को  देखें और संभल की मस्जिद के सर्वेक्षण के आदेश और उस सर्वेक्षण के दौरान हुई झड़प में पुलिस के रवैये पर ध्यान दें तो इस रिश्ते को समझ पाएँगे। संभल के क़रीब मुसलमान बहुल कुंदरकी में भाजपा भारी बहुमत से जीती है। इसके कारण मीडिया के द्वारा खोजे जा रहे हैं।लेकिन हमने इसके वीडियो देखे कि पुलिस मुसलमान मतदाताओं को बूथ तक जाने से रोक रही है। उनकी वोटर पर्ची छीन रही है और  गोली चलाने की धमकी दे रही है। दूसरे इलाक़ों से भी ऐसी शिकायतें मिली हैं। जैसी अपेक्षा थी चुनाव आयोग ने इन शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया। वह माने न माने, सब जानते हैं कि पुलिस और प्रशासन को भाजपा के हक़ में काम करने में हिचक नहीं है।मज़े की बात यह है कि ...

कौन भारतीय , कैसे भारतीय ?

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  कौन भारतीय , कैसे भारतीय ? : #KadwiCoffee

भारत की अफसरशाही आरएसएस के गुंडाराज के आगे नतमस्तक क्यों

    वक़्त  बेवक़्त, 18 Nov, 2024 भारत में गुंडा राज चल रहा है। हाल की दो घटनाओं से इसका सबूत मिलता है। एक उदयपुर में आर एस एस के उपद्रवियों द्वारा उदयपुर में 9 साल से चले आ रहे सालाना फ़िल्म उत्सव को भंग करने की घटना है। दूसरी  हिंदुत्ववादी गुंडों के द्वारा देहरादून के मशहूर दून स्कूल के परिसर में घुसकर वहाँ स्थित एक मज़ार के तोड़ने की घटना है।   आर एस एस  के उपद्रवियों ने उदयपुर फ़िल्म उत्सव के दूसरे दिन शबनम विरमानी की फ़िल्म ‘हद-अनहद’ को बाधित किया और उनके दबाव में आर एन टी मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने उत्सव की अनुमति वापस ले ली।आर एस एस के उपद्रवियों ने उत्सव पर हमले का बहाना यह बनाया कि आयोजकों ने इज़राइली हमले में मारे गए बच्चों और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर साईबाबा को श्रद्धांजलि क्यों दी। गुंडों की संख्या  अधिक न थी। लेकिन कॉलेज के प्राचार्य कक्ष में उनको ससम्मान बिठाया गया। फ़िल्म उत्सव के आयोजकों को उनसे बातचीत के लिए बुलाया गया। प्राचार्य या कॉलेज प्रशासन ने  उत्सव की अनुमति दी थी।हॉल के इस्तेमाल के लिए शुल्क लिया था। लेकिन वे अपनी...

“The Gold Standard American Journalism That I Was Taught Actually Pulled the Wool Over My Eyes”

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Legendary cartoonist Joe Sacco was hosted by The Wire on November 11, 2024 under Nehru Dialogues at Jawahar Bhawan in New Delhi.  https://www.youtube.com/watch?v=x9gLoWeFUqY

Nehru के बारे में बात कैसे करें?

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 https://youtu.be/EiLqilxvJ-E?si=2GO3kmhuAyQ0ZqEV

How Should One Mourn the Death of a Person Who Served a Repressive Regime?

  05/Nov/2024 It requires extraordinary moral blindness to pursue scholarly interests undisturbed while fellow citizens face systematic violence and discrimination. How should one remember someone after their death? Especially someone who served a government known for its anti-Muslim policies and actions? How should one mourn the death of a person who played a key role in running a fascist regime? How should one find virtues in a person who dedicated their intellect to the service of a fascist leader and party? It has been a tradition in India that one does not speak ill of the dead. That is why, even after the death of Atal Bihari Vajpayee, who first called himself a   Swayamsevak   – member of the Rashtriya Swayamsevak Sangh (RSS) – and   popularised anti-Muslim politics   in India, he was praised by politicians of all stripes. Lal Krishna Advani is physically alive but politically dead. There are people among us who seek virtues in the person who played the m...