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Showing posts from August, 2024

तानाशाह की जमीन दरक रही है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं को शर्म नहीं

 वक़्त  बेवक़्त,  19 Aug, 2024 “तो आपको क्या लग रहा है? चीज़ें बदल रही हैं? क्या चुनाव ने कुछ बदला है?” 4 जून को गुजरे 2 महीने हो गए लेकिन लोगों के सवाल में तब्दीली नहीं आई है। हमसे मिलने वाले एक ही तरह के हैं। जिन्हें कुछ हिक़ारत और कुछ दया के साथ धर्मनिरपेक्ष कहा जाता है। उनके स्वर में चिंता है और उम्मीद भी है। 18वीं लोक सभा के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को अपने दम पर बहुमत न मिलने को  बड़ी घटना माना गया। जो सरकार शासन के हर मोर्चे पर विफल हो गई हो उसका सत्ता से बाहर होना जनतंत्र के लिए स्वाभाविक ही माना जाना चाहिए। लेकिन भाजपा को बहुमत न मिलना असाधारण था या एक असंभव घटना थी, इससे यही मालूम होता है कि भारतीय जनतंत्र को चलानेवाली सारी संस्थाओं ने ख़ुद को प्रायः भाजपा के विभागों में बदल दिया था और वे सब मिलकर जनमत के विरुद्ध साज़िश कर रही थीं। चुनाव आयोग हो या प्रशासन हो या मीडिया: सबने मिलकर तय किया था कि भाजपा को किसी भी तरह वापस लाना है। इस संयुक्त राष्ट्रीय महाप्रयास के बावजूद  भाजपा बहुमत से दूर रह गई।लेकिन अगर इस वजह से आप समझ बैठे हैं कि चुनाव आयोग सुधर ज...

भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव के मुक़दमे की कहानी : Prof. Aparna Vaidik

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  भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव के मुक़दमे की कहानी : Prof. Aparna Vaidik with ‪@kadwicoffee‬ - YouTube

बांग्लादेश के हिन्दू क्या चाहते हैं, राष्ट्रवादी हिन्दुओं जरा पता करो

  वक़्त  बेवक़्त, 12 Aug, 2024 बांग्लादेश में जगह जगह हिंदू अपनी हिफ़ाज़त की माँग करते हुए हज़ारों की संख्या में प्रदर्शन कर रहे हैं। उनके साथ बड़ी तादाद में मुसलमान भी हैं। हिंदू इन प्रदर्शनों में धार्मिक नारे भी लगा रहे हैं। अंतरिम सरकार के सारे सदस्य उनके साथ खड़े हैं। कोई इन प्रदर्शकारियों पर यह कहकर हमला नहीं कर रहा कि ये हिंदू बांग्लादेश को बदनाम करने के भारतीय/अंतर्राष्ट्रीय षड्यंत्र के औज़ार हैं, कि उन्हें सीमा पार से भड़काया जा रहा है। बांग्लादेशी हिंदू आत्मविश्वासपूर्वक कह रहे हैं कि वे बांग्लादेशी हैं और कोई उन्हें वहाँ से भगा नहीं सकता। वे अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए विशेष प्रावधान की माँग कर रहे हैं। मालूम हुआ कि उनकी माँगों में एक माँग दुर्गापूजा के लिए 5 दिनों की छुट्टी की भी है। इससे उनकी मानसिक अवस्था का पता चलता है। वे अगर सिर्फ़ अपने जानोमाल को लेकर चिंतित होते तो दो महीना दूर पूजा उनके दिमाग़ में न होती! जगह जगह मंदिरों के सामने,हिंदुओं की आबादीवाले मोहल्लों में छात्र और दूसरे मुसलमान पहरा दे रहे हैं, चौकसी में लगे हुए हैं। मुसलमान धार्मिक नेता मंदिरों का...