03 Feb, 2025 , वक़्त बेवक़्त अभी मारे गए लोगों की गिनती भी नहीं हुई है, चिताओं की आग ठंडी भी नहीं हुई है लेकिन महाकुंभ से महाहास की तस्वीरें जारी की जाने लगी हैं। महाकुंभ में भगदड़ और मौतों के दो दिन बाद ही उपराष्ट्रपति और अन्य ‘वी आई पी’ लोगों ने डुबकी लगाते फोटो खिंचवाई और प्रसारित की। सरकार ने ही नहीं, मीडिया ने दो दिन बाद ही यह बतलाना शुरू कर दिया कि बावजूद इन मौतों के, महाकुंभ से संसार के समंदर में तरंगें उठ रही हैं। 77 देशों के 117 प्रतिनिधि महाकुंभ पहुँच चुके हैं। किसी ने न पूछा कि क्या वे अपने खर्चे पर गए हैं या हमारी सरकार उन्हें हमारे कंधों पर बैठाकर ले गई है? वहाँ एक विदेशी कह रहा है कि मानवता का आरंभ भारत में ही हुआ था।भारतीयों, विशेषकर हिंदुओं के लिए श्वेतांग के प्रमाण पत्र से बढ़कर और कुछ नहीं है। एक टी वी रिपोर्टर उत्तेजित होकर एक विदेशी महिला प्रतिनिधि से पूछा रहा है कि डुबकी लगाकर कैसा लगा।वह कहती है, ‘अद्भुत’। क्या डुबकी के इस अनुभव के लिए भी सरकार का शुक्रिया अदा करना है? आप उत्तर प्रदेश सरकार के प्रबंध के बारे में क्या कहेंगी? ‘मुझे जाना है,’ क...