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Showing posts from February, 2024

Resisting Dictatorship, One Video at a Time

  27.02.2024 At a time when big media platforms have deployed all their resources to glorify the government led by Prime Minister Narendra Modi, a video asking if India is headed towards dictatorship getting mass viewership assumes greater significance. She feels distraught because she does not get complete information what can I do to help him she depends on me for love, Every time she knows something incomplete, or one day she’ll stop asking Or when she will be reprimanded for asking one day suddenly some day taking a deep breath She will turn her face away quietly. These are the lines from late poet Raghuvir Sahay’s poem ‘Uska Man’. In the poem, he is talking about a woman. But, as is the case with every great poem, its pronoun can be used in different contexts. In the context of today’s India, does this pronoun ‘she’ represent the collective noun we know as public? Not getting information can be a reason for being distraught. Just as it is difficult for a woman to survive as an...

ध्रुव राठी के वीडियो पर सार्वजनिक उत्तेजना के मायने

  वक़्त  बेवक़्त    26 Feb, 2024 ‘उसका मन नहीं लगता  क्योंकि उसे पूरी सूचना नहीं मिलती मैं उसकी क्या मदद करूँ  वह मुझ पर प्यार के लिए निर्भर है …. हर बार वह किसी बात को अधूरी जानती है  …. या तो वह एक दिन पूछना बंद कर देगी  या जब पूछने पर फटकारी जाएगी तो  एक दिन एकाएक किसी दिन  लंबी साँस लेकर   मुँह फेर लेगी चुपचाप।’ ये रघुवीर सहाय की कविता ‘उसका मन’ की पंक्तियाँ  है। कविता में यह बात वे औरत के बारे में कर रहे हैं। लेकिन जैसा हर बड़ी कविता के साथ होता है, उसका सर्वनाम दूसरे संदर्भों में औरत के अलावा किसी और संज्ञा के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। क्या आज के भारत के संदर्भ में यह सर्वनाम जनता नामक समूहवाचक संज्ञा के लिए है? सूचना न मिलना अन्यमनस्क होने का एक कारण  हो सकता है। जैसे सूचना के बिना किसी औरत का व्यक्ति के तौर पर ज़िंदा रहना मुश्किल होता है, उसी तरह जनता में ज़िंदगी भी सूचना ही भरती है।  ध्रुव राठी के एक वीडियो से पैदा हुई सार्वजनिक उत्तेजना को देखते...

वह समाज कहाँ है जो अपने शिक्षकों से वीरता की माँग करता है?

वक़्त  बेवक़्त  19 Feb, 2024 भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी संगठन जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े हैं, ज्ञान और शिक्षा के मित्र तो क़तई नहीं हैं और इसलिए वह अध्यापकों और विद्यार्थियों के लिए भी ख़तरा हैं। यह पहले भी मालूम था लेकिन ये पिछले 10 सालों में तो बार बार साबित हुआ है। इसके बावजूद 11 फ़रवरी को कर्नाटक के मंगलोर के सेंट गेरोसा हायर प्राइमरी स्कूल की अध्यापिका सिस्टर प्रभा के निलंबन के बाद फिर से यह कहा जाना ज़रूरी है। सिस्टर प्रभा को भारतीय जनता पार्टी के विधायक वेदव्यास कामथ के दबाव के कारण स्कूल ने निलंबित कर दिया है। भाजपा ने सिस्टर प्रभा पर हिंदू धर्म के अपमान का आरोप लगाया था। साथ ही यह इल्ज़ाम भी लगाया कि वे प्रधानमंत्री के ख़िलाफ़ बोल रही थीं। ‘टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ के मुताबिक़ सिस्टर प्रभा रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता ‘वर्क इज़ वरशिप पढ़ा रही थीं। इस कविता को पढ़ाते हुए उन्होंने बतलाया कि कवि के अनुसार ईश्वर मंदिर, मस्जिद, चर्च जैसी इमारतों में नहीं है और न माला फेरने से उसे पाया जा सकता है। सिस्टर प्रभा ने कहा कि ईश्वर इन इमारतों में नहीं बल्कि हमारे हृदय में नि...

अध्यापकों द्वारा मोदी के पक्ष में गोलबंद करना राजनीति नहीं, राष्ट्रनीति?

    वक़्त  बेवक़्त,  12 Feb, 2024 हमारे कई सहकर्मी अध्यापकों और शोधार्थियों ने मिलकर ‘एकेडेमिक्स फॉर नमो’ नामक मंच बनाया है। नमो ‘नमो नमः’ वाला नमो नहीं है। वह नरेंद्र मोदी के आरंभिक अक्षरों को मिलकर बनाया गया है। यह संक्षेपीकरण नेता के नाम को कर्णप्रिय बनाने के लिए उन्हीं की टीम के द्वारा गढ़ा गया था। हमने अनेक अवसरों पर नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक अवतरण पर ‘नमो, नमो’ के नारे सुने हैं। मोदी, मोदी की तरह ही नामो को लोकप्रिय बनाने में मीडिया की भी ख़ासी भूमिका है। शायद जगह बचाने के लिए या स्मार्ट दीखने के लिए नरेंद्र मोदी लिखने की जगह वह नामो लिखता है। रोमन लिपि में यह NAMO लिखा जाता है। हम हिंदी में इसे कैसे बोलें: नामो या नमो?   यानी यह भी इन बुद्धिजीवियों की अपनी ईजाद नहीं है। मंच के नाम को लिखा जाता है इस तरह; Academics4NaMo। फॉर की जगह 4 लिखकर नए ज़माने का होने का दावा पेश किया जा रहा है। यह विज्ञापन के, एस एम एस के ज़माने का प्रयोग है। हम अध्यापक अपने छात्रों को पूरे शब्द और वाक्य लिखने के लिए कहते रहते हैं। यहाँ अध्यापक ही उस भाषा का प्रयोग कर रहे हैं जो ...