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'गांधी विचार' के हत्यारे क्यों कर रहे हैं शांति की बातें, सावधान रहिये

  23 Dec, 2024,  वक़्त  बेवक़्त राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को इस पर विचार करना चाहिए कि  जब वे कोई भली बात कहते हैं तो क्यों उनके अनुयायी मुँह दबा कर और दूसरे ज़ोर ज़ोर से हँसने लगते हैं। आर एस एस के प्रमुख  के मुँह से  प्रेम, सद्भाव ,शांति जैसे शब्द सुनकर उनके अनुयायी एक दूसरे से कहते हैं कि यह सब हमारे लिए नहीं है, यह तो दुनिया को सुनाने के लिए कहा जा रहा है। दूसरे कहते हैं कि इनकी इन बातों का कोई मोल नहीं, इन लोगों का कोई भरोसा नहीं। दोनों ही कहते हैं कि पिछले 100 साल में जाने कितनी बार ये बातें कही हैं लेकिन किया ठीक इसके उलटा है।  आर एस एस का इतिहास और उसका आचरण यह बतलाता है कि उसका एक मुँह दुनिया की तरफ़ घूमा होता है और एक उसके अपने लोगों की तरफ़ मुड़ा होता है। वह गाँधी को माला पहनाता है और उनके हत्या के षड्यंत्रकर्ता को अपना आदर्श बतलाता है।क्या आर एस एस के पदाधिकारी या अटल बिहारी वाजपेयी, लाल कृष्ण आडवाणी या नरेंद्र मोदी भारत से बाहर कहीं अपने परिचय में यह कहने का साहस कर सकते हैं कि हम तो गोलवलकर और सावरकर के शिष्य हैं जिनके आद...

'सुप्रीम कोर्ट ही देश को हिंदुत्ववादी अराजकता से बचा सकता है'

    16 Dec, 2024   वक़्त  बेवक़्त मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना के साथ न्यायमूर्ति पी वी संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन वाली सर्वोच्च न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की पीठ को शुक्रिया अदा  करना हमारा फर्ज है। इस पीठ ने  1991 के धार्मिक स्थलों संबंधी क़ानून की वैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई शुरू की है।लेकिन उसके सामने इस क़ानून को कारगर तरीक़े से लागू करने की माँग करनेवाली अर्ज़ियाँ भी हैं। पीठ ने संघीय सरकार को इसके बारे में अपना पक्ष स्पष्ट करने की नोटिस दी है।लेकिन उसने इससे कहीं अधिक महत्त्वपूर्ण काम किया है। जब तक इन याचिकाओं की सुनवाई नहीं होती, पूरे देश की कोई अदालत किसी भी धार्मिक स्थल की मिल्कियत या उसके चरित्र के बारे में कोई फ़ैसला नहीं ले सकती। यह तय करने के लिए किसी तरह का कोई सर्वेक्षण भी नहीं किया जा सकता।  ये याचिकाएँ पिछले 2 साल  से भी अधिक वक्त से पड़ी हुई हैं। इस बीच एक के बाद एक मस्जिदों और मुसलमानों के दूसरे धार्मिक स्थलों को विवादित बनानेवाली अर्ज़ियाँ विभिन्न अदालतों में लगाई जा रही हैं और अदालतें उ...