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Showing posts from June, 2024

कैसे बनती हैं स्कूली किताबें: योगेंद्र यादव और सुहास पल्शीकर से अपूर्वानंद की बातचीत

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कैसे बनती हैं स्कूली किताबें: योगेंद्र यादव और सुहास पल्शीकर से अपूर्वानंद की बातचीत I #kadwicoffee - YouTube  

Opposition’s Shocking Silence in the Face of Anti-Muslim Violence

  25/Jun/2024 This violence has a direct relationship with the hatred that Prime Minister Narendra Modi and the BJP incited against Muslims during the election campaign. “We must take notice of this incident as our nation is on the brink. We have now reached a point where we are using religion to justify mob violence and street justice, flagrantly violating the Constitution, the law and the state.” This statement is not from an Indian minister or leader, even though there is a dire need for such statements in India.  Pakistan’s planning minister, Ahsan Iqbal Chowdhury, said this  during a debate on the budget in the national assembly of Pakistan. The Pakistan Muslim League (Nawaz) party leader said that the assembly would have to take a firm stand on this issue as Pakistan was under scrutiny. Iqbal was reacting to the mob lynching of 40-year-old Mohammad Ismail, a resident of Sialkot. Ismail had gone to Swat, where he was accused of burning some pages of the  Quran ....

संघ के लोगों ने मेरे घर से खाना बँधवाया और बाहर जाकर फेंक दिया: भँवर मेघवंशी

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https://youtu.be/pGDJtXtB6hs?si=iI_6vQa30wgO2i3v  

आशंकाओं से संभावनाओं की तरफ़

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  https://youtu.be/H3giPA5hZhc?si=pvH2j6RMZufkUzQx

पूर्ण बहुमत नहीं मिला तो भी सरकार का रुख क्यों नहीं बदला?

  वक़्त  बेवक़्त,  17 Jun, 2024 कुछ भलेमानस बहुत पहले से कह रहे थे कि वे तो बस इतना चाहते हैं कि न फासिस्ट को पूर्ण बहुमत मिले और न फ़ासिस्ट के विरोधियों को पूर्ण बहुमत मिले। ऐसी कामना करते वक्त उन्होंने यह न समझा कि पिछले 10 सालों में राजकीय तंत्र का और हिंदू जनता के एक हिस्से का भी फ़ासिस्टीकरण हुआ है। मध्य प्रदेश के रतलाम ज़िले के जावरा शहर में 4 मुसलमानों को गिरफ़्तार कर लिया गया। उनपर इल्ज़ाम है कि उन्होंने एक मंदिर में गाय का सर फेंका था। प्रशासन ने उनके घरों को बुलडोज़र से ढाह उसपर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून के तहत मामला दर्ज किया। मध्य प्रदेश में ही मांडला के बैंनवाही में 11 मुसलमानों को गिरफ़्तार कर लिया गया और उनके घरों को बुलडोज़र से ध्वस्त कर दिया गया। आरोप लगाया कि वे गोकुशी कर रहे थे। उसके पहले छत्तीसगढ़ में दो मुसलमानों को पीट पीट कर मार डाला गया। उनपर गाय की तस्करी का इल्ज़ाम था। गुजरात में भीड़ ने बक़रीद की क़ुर्बानी के लिए बकरे ले जा रहे मुसलमानों पर हमला किया। इसी बीच खबर आई कि वडोदरा में एक हाउसिंग कॉलोनी के हिंदू निवासियों ने एक मुसलमान महिला को, जो सरकार...

नरेंद्र मोदी आरएसएस के असली ‘सपूत’ हैं और संघ मोदी का सबसे बड़ा लाभार्थी

15/06/2024   मोहन भागवत ने अपने हालिया प्रवचन में कहा कि चुनाव में क्या होता है इसमें आरएसएस के लोग नहीं पड़ते पर प्रचार के दौरान वे लोगों का मत-परिष्कार करते हैं. तो इस बार जब उनके पूर्व प्रचारक नरेंद्र मोदी और भाजपा घृणा का परनाला बहा रहे थे तो संघ किस क़िस्म का परिष्कार कर रहा था? ‘क्या आपने भाषण सुना?’, मेरे मित्र की आवाज़ में उत्तेजना थी. कौन सा भाषण, किसका भाषण, यह बताना भी उन्होंने ज़रूरी नहीं समझा. उन्हें इसका विश्वास था कि उनका इतना भर कहना पर्याप्त है और मैं समझ जाऊंगा कि वे किस भाषण की बात कर रहे हैं. मैं भी समझ ही गया था हालांकि न समझने का नाटक मैंने किया. देर तक यह नहीं किया जा सकता था: आख़िर देश में अभी एक ही भाषण की चर्चा हो रही है! और वह भाषण मोहन भागवत का सबसे नया प्रवचन था. भागवत ने  कहा  कि अभी संपन्न हुए चुनावों में मर्यादा की रक्षा नहीं की गई. उन्होंने कहा कि जनतंत्र में विपक्ष या प्रतिपक्ष का भी उतना ही महत्त्वपूर्ण स्थान है जितना सत्ताधारी दल का. उन्होंने यह भी कहा कि मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है. वहां आग लगी हुई है या लगाई गई है. भाषण ल...

तानाशाही जनतंत्र के भीतर, उसी के सहारे पैदा होती है

14/06/2024   एक आवाज़: तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते. हमारे पास क़ानून हैं. हमारे पास अदालतें हैं. हमारे पास संगठन हैं. एक आवाज़: तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते. आख़िर मैं कार्ल मार्क्स में यक़ीन करता हूं. एक आवाज़: तुम मेरे साथ ऐसा नहीं कर सकते. संविधान इसकी मनाही करता है. एक आवाज़: मैंने हमेशा ख़ुशी ख़ुशी सहयोग किया. एक आवाज़: मुझे यह अच्छा धंधा लगा. एक आवाज़: मुझे यह वर्ग संघर्ष मालूम दिया. एक आवाज़: मुझे यह अपने वक़्त में अमन की तरह जान पड़ा. तानाशाह आवाज़: आपको धन्यवाद, देवियो और सज्जनो. जनतंत्र का ख़ात्मा हो चुका है. आपका ख़ात्मा हो चुका है. अब बस हम हैं. … तुमने मुझे ग़लत समझा. दूसरों ने अक्सर यही गलती की है. अक्सर और बार-बार कई मुल्कों में मैं कभी लोगों की ताक़त का सहारा नहीं लेता. मैं उनकी कमज़ोरियों और भय के सहारे बढ़ता हूं. मैं उनके संदेहों को अपने सहयोगी और जासूस बना लेता हूं. मेरे पास सबसे विश्वास करने योग्य अमन का मुखौटा है. विशेषज्ञों के द्वारा रंगा हुआ, एक तरह के मूर्खों के लिए, और दूसरे के लिए मैं एक अच्छा व्यवसायी हूं, बिना लाग लपेट, व्यवसाय और बाज़ार की बात करनेवा...

अधूरेपन का एहसास जनतांत्रिकता की बुनियाद है

  12/06/2024 जनतंत्र तरलता और निरंतर गतिशीलता से परिभाषित होता है. न तो व्यक्ति कभी अंतिम रूप से पूर्ण होता है, न कोई समाज. लेकिन अपूर्णता का अर्थ यह नहीं कि आप अपने साथ कुछ करते ही नहीं, ख़ुद को पूर्णतर करने का प्रयास लगातार चलता है. कविता में जनतंत्र स्तंभ की 31वीं क़िस्त. …और, जब मेरा सिर दुखने लगता है, धुंधले-धुंधले अकेले में, आलोचनाशील अपने में से उठे धुएं की ही चक्करदार सीढ़ियों पर चढ़ने लगता हूं. और हर सीढ़ी पर लुढ़की पड़ी एक-एक देह, आलोचन हत मेरे पुराने व्यक्तित्व, भूतपूर्व, भुगते हुए, अनगिनत ‘मैं’. अनेक शवों, अर्ध-शवों पर ही रखकर निज सर्व-स्पृश पैर, मेरे साथ चलने लगता भावी-कर-बद्ध मेरा वर्तमान ! किंतु, पुनः-पुनः उन्हीं सीढ़ियों पर नए-नए आलोचक-नेत्र (तेज़ नाक वाले तमतमाए-से मित्र) खूब काट-छांट और गहरी छील-छाल, रंदों और बसूलों से मेरी देखभाल, मेरा अभिनव संशोधन अविरत क्रमागत. अभी तक सिर में जो तड़फड़ाता रहा ब्रह्मांड, लड़खड़ाती दुनिया का भूरा मानचित्र चमकता है दर्दभरे अंधरे में वह क्रमागत काण्ड. उसमें नए नए सवालों की झखमार ; थके हुए, गिरते-पड़ते, बढ़ने का दौर; मार-काट करती हुई...