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Showing posts from January, 2025

हमारा मुल्क क्या बीमार है, यह देश ईसाइयों के लिए नहीं है?

  वक़्त  बेवक़्त,  27 Jan, 2025 वह मुल्क कैसा मुल्क है जहाँ किसी को अपनी ज़मीन में ही दफ़्न होने की इजाज़त न हो और वे लोग कैसे लोग हैं जो अपने गाँव के ही एक आदमी को अपने  पुरखों के बग़ल में मिट्टी देने से रोकें? वह मुल्क कैसा है जहाँ लोगों को भली बातें बतलाने के लिए किसी को 5 साल की क़ैद की सज़ा सुनाई जाए क्योंकि वह ईसाई है? इस मुल्क का नाम भारत है। क्या हम भारत के लोग अपने इस मुल्क को पहचानते हैं?    75 साल पूरा करने के मौक़े पर भारतीय गणतंत्र  की सूरत कैसी नज़र आती है? 26 जनवरी, गणतंत्र दिवस के ठीक पहले की इन दो खबरों और एक रिपोर्ट से मालूम पड़ता है कि हमारा गणतंत्र बीमार है। एक खबर छत्तीसगढ़ की है और दूसरी उत्तर प्रदेश की। ये दोनों खबरें ईसाइयों पर उत्पीड़न और उन्हें अधिकार विहीन करने की हैं। रिपोर्ट ईसाइयों के एक संगठन की है जिसने ईसाइयों के ख़िलाफ़ हिंसा की घटनाओं की फ़ेहरिस्त जारी की है और उन पर चिंता ज़ाहिर की है। यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम की इस रिपोर्ट के मुताबिक़ 2014 में ईसाई समुदाय पर हमलों की प्रकट संख्या 127 थी जो 2024 में 834 तक पहुँच ग...
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  The Big Picture - Universities and Nationalism 24 Feb 2016,  Sansad TV    https://youtu.be/qMB3gf5-v8E

बेशर्मी: विशेषज्ञों को 'खान मार्केट गैंग' कहने पर क्या आप चिंतित हैं?

  वक़्त  बेवक़्त,  20 Jan, 2025 दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति ने एक कार्यक्रम में श्रोताओं को तटस्थता का त्याग कर राष्ट्र हित के पक्ष में  काम करने के बारे में सोचने के लिए कहा। कार्यक्रम ‘मोदी VS ख़ान मार्केट गैंग’ नामक किताब के लोकार्पण का था। इस किताब के लेखक को पत्रकार कहा जाता है। मंच पर कुलपति के अलावा भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी जिन्हें नेता कहा जाता है, मौजूद थे। श्रोताओं में कॉलेजों के प्राचार्य, अध्यापक और छात्र बड़ी संख्या में मौजूद थे। विश्वविद्यालय के कुछ अन्य अधिकारी भी। हॉल खचाखच भरा था। किसी किताब के लोकार्पण समारोह में इतनी बड़ी संख्या में अध्यापक और छात्र उमड़ कर आएँ, इससे अधिक प्रसन्नता की बात किसी भी विश्वविद्यालय के लिए और क्या हो सकती है।वह भी जब लेखक अपने क्षेत्र में प्रतिष्ठित न हो और किताब के बारे में शायद ही  कोई जानता हो। प्राचार्यों की पुस्तकों में ऐसी रुचि का प्रदर्शन देखकर विश्वविद्यालय को जाननेवाले व्यक्ति को सुखद आघात लग  सकता है। छात्र भी बौद्धिक चर्चा के प्रति इस प्रकार उत्सुक हों, यह किसी भी शिक्षा संस्थान के लिए शुभ ही...