Posts

Showing posts from January, 2024

इज़राइल के मामले में भारत दक्षिण अफ्रीका के साथ क्यों नहीं है?

वक़्त  बेवक़्त     29 Jan, 2024   भारत ने इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ़ जस्टिस के उस फ़ैसले पर इन पंक्तियों के लिखे जाने तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है जिसमें उसने इज़राइल को फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ जनसंहार रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाने को कहा है। उसने यह माना है कि दक्षिण अफ़्रीका के इस आरोप में दम है कि इज़राइल ग़ज़ा में फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ जनसंहारात्मक कार्रवाई कर रहा है और आगे भी इसका ख़तरा है कि वह इसे जारी रखेगा। दक्षिणी दुनिया समेत कई देशों ने इस फ़ैसले का स्वागत किया है और इज़राइल को ग़ज़ा और पश्चिमी तट में अपनी खूँरेजी रोकने को कहा है। पिछले महीने दक्षिण अफ़्रीका ने इस अदालत में इज़राइल के ख़िलाफ़ मुक़दमा दायर किया था और अदालत से दरख्वास्त की थी कि वह इज़राइल को अपना हमला रोकने को कहे। अदालत ने सीधे तो यह नहीं कहा है कि इज़राइल हमला फ़ौरन रोके लेकिन जो उसने स्पष्ट तौर पर कहा है कि इज़राइल को फ़िलिस्तीनियों का जनसंहार न होने के लिए सारे कदम उठाने चाहिए। उसने इज़राइल को वैसे सारे सबूत भी सुरक्षित रखने को कहा है जिनकी जाँच से यह मालूम किया जा सकेगा कि वह जो कर...

धर्मनिरपेक्षता ग़लत साबित नहीं हुई है!

  वक़्त  बेवक़्त,      22 Jan, 2024 22 जनवरी विजय और पराजय, दोनों का ही दिन है। यह बहुसंख्यकवाद के बल की विजय और धर्मनिरपेक्षता की पराजय का क्षण है। यह भारत के प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता के प्राण हरण का क्षण भी है। राज्य की सारी संस्थाएँ अपने सारे संसाधनों के साथ राम मंदिर के उद्घाटन में जुटी हुई हैं और प्रधानमंत्री ख़ुद उसका नेतृत्व कर रहे हैं। यह सब देखते हुए भारत को धर्मनिरपेक्ष कहना सिर्फ़ ख़ुद को भुलावा देना है। विडंबना यह है कि इस क्षण को एक विराट जनतांत्रिक क्षण कह सकते हैं।आख़िर गली गली, घर-घर धनुषधारी राम की छवि के साथ भगवा पताकाएँ लहरा रही हैं। दुकानों में और विश्वविद्यालयों में इस क्षण के स्वागत और उत्सव का उल्लास महसूस किया जा सकता है। इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि 22 जनवरी, 2024 के लिए देशव्यापी जनगोलबंदी की गई है। जिनकी उम्र 50 से अधिक है, वे याद कर सकते हैं कि राम शिला यात्रा के समय और फिर 6 दिसंबर, 1992 को बाबरी मस्जिद को गिराने के लिए इसी तरह की व्यापक जन गोलबंदी की गई थी। राम मंदिर के उद्घाटन के इस क्षण को इसलिए एक ज...

क्या इस समय हिंदुओं में धार्मिकता को राम मंदिर परिभाषित कर रहा है?

  19/01/2024 अयोध्या को भारत की, या कहें हिंदुओं की धार्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने का राज्य समर्थित अभियान चल रहा है. लोगों के दिमाग़ में 22 जनवरी, 2024 को 26 जनवरी या 15 अगस्त के मुक़ाबले एक अधिक बड़े और महत्त्वपूर्ण दिन के रूप में आरोपित करने को भरपूर कोशिश हो रही है. पूरे भारत में हिंदुओं में धार्मिकता संक्रामक रोग की तरह फूट पड़ी है. इसका स्रोत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ है लेकिन इसके कीटाणु अख़बारों, टीवी चैनलों और सोशल मीडिया के विभिन्न मंचों के द्वारा फैलाए जा रहे हैं. इस संक्रामक रोग का प्रसार राजनीतिक पार्टियां और और सरकारें उत्साह के साथ अपने सारे संसाधनों के ज़रिये कर रही हैं. धार्मिकता के बारे में इस प्रकार नकारात्मक तरीक़े से बात करने पर आपत्ति की जा सकती है. धार्मिकता के प्रसार की किसी संक्रामक रोग के प्रसार से तुलना करने पर एतराज किया जा सकता है. कहा जा सकता है कि क्या धार्मिक होना बुरा है. लेकिन यह स्पष्ट है कि हम यहां जिस धार्मिकता की बात कर रहे हैं, वह आध्यात्मिक शांति प्रदान करने वाली धार्मिकता नहीं है हालांकि उससे भ्रम ऐसा ही होता है. धार्मिकता में अपने से ...