Modi-fied Democracy? | Conversation with Aakar Patel and Armaan Lilothia
Jul 26, 2022
बीते 12 जुलाई को अपने भाषण में, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि भारत ‘Mother of Democracy’ है। मगर शायद उन्हें यह लगता है की लोकतंत्र सिर्फ़ चुनाव जीतना है। असल में चुनाव जीतने के बाद ही लोकतंत्र की असली चुनौतियां शुरू होती हैं। इनमें से सबसे बड़ी चुनौती है, कि सरकार अपनी आलोचना को किस रूप में देखती है। उनके साथ व्यवहार करने के तरीके से ही लोकतंत्र की असली परीक्षा होती है। यदि हर असंतुष्ट आवाज को कुचल दिया जाता है, तो यह माना जा सकता है कि भारत निश्चित रूप से फ़ासिवाद की ओर बढ़ रहा है। पिछले आठ सालों में मोदी सरकार ने ऐक्टिविस्ट, जर्नलिस्ट और क्रांतिकारी आवाज़ों को ख़ामोश करने की पुरज़ोर कोशिश की है। Dissent पर सरकार द्वारा बढ़ते हमलों पर चर्चा करने के लिए The Tryst की ख़ास पेशकश में साथ जुड़े है प्रो. अपूर्वानंद और आकार पटेल जी।
बीते 12 जुलाईhttps://www.youtube.com/watch?v=-dCvBoPRpEE को अपने भाषण में, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने दावा किया कि भारत ‘Mother of Democracy’ है। मगर शायद उन्हें यह लगता है की लोकतंत्र सिर्फ़ चुनाव जीतना है। असल में चुनाव जीतने के बाद ही लोकतंत्र की असली चुनौतियां शुरू होती हैं। इनमें से सबसे बड़ी चुनौती है, की सरकार अपनी आलोचना को किस रूप में देखती है। उनके साथ व्यवहार करने के तरीके से ही लोकतंत्र की असली परीक्षा होती है। यदि हर असंतुष्ट आवाज को कुचल दिया जाता है, तो यह माना जा सकता है कि भारत निश्चित रूप से फ़ासिवाद की ओर बढ़ रहा है।
पिछले आठ सालों में मोदी सरकार ने ऐक्टिविस्ट, जर्नलिस्ट और क्रांतिकारी आवाज़ों को ख़ामोश करने की पुरज़ोर कोशिश की है। Dissent पर सरकार द्वारा बढ़ते हमलों पर चर्चा करने के लिए The Tryst की ख़ास पेशकश में साथ जुड़े है प्रो. अपूर्वानंद और आकार पटेल जी।
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